कॉल से ज़्यादा ज़रूरी है दिनचर्या
छोटे बच्चे माता-पिता को उस तरह याद नहीं करते जैसा बड़े सोचते हैं। उन्हें यह खटकता है कि शाम का ढाँचा बदल गया — जो कहानी रोज़ होती थी, वह आज नहीं हुई। दिनचर्या बचा लेने से गड़बड़ी सिमट जाती है: पापा बाहर हैं, बाकी सब वैसा ही है।


