लहजा क्यों मायने रखता है
मैक्सिको के परिवार का बच्चा जब कैस्टिलियन स्पेनिश में कहानी सुनता है, तो वह अपनी ही भाषा का कोई दूर का रिश्तेदार सुन रहा होता है। समझ तो आती है — पर अपनी नहीं लगती। यही बात क्यूबेक के परिवार को पेरिस की फ़्रेंच देने पर लागू होती है, या मिस्र के परिवार को सिर्फ़ मानक अरबी देने पर। लहजा पहचान लिए चलता है, इसीलिए यहाँ हर भाषा की एक ही आवाज़ बनाने के बजाय रूप अलग-अलग रखे गए हैं।
दो भाषाओं वाले घरों के लिए
स्कूल में दिन के आठ घंटे एक भाषा चलती है। घर की भाषा के हिस्से रसोई और छुट्टी का दिन आता है। सोने से पहले की कहानी उन गिने-चुने रोज़ाना मौकों में से है जो भाषा से भरे होते हैं और जिन्हें बचाया जा सकता है — और जो कहानी बच्चा एक भाषा में पहले से जानता है, वही दूसरी भाषा में घुसने का सबसे आसान रास्ता है।
अपने परिवार की भाषा में कहानियाँदादी की आवाज़, दादी की भाषा में
इसका सबसे असरदार रूप है दादा-दादी का कहानी सुनाना। दादी लखनऊ में, पोता बर्लिन में — बच्चे को हिंदी की कहानियाँ उसी की आवाज़ में मिलती हैं जिसकी हिंदी है। इससे भाषा किसी अपने से जुड़ जाती है, और यही वह चीज़ है जो घर की भाषा को बच्चे के साथ टिकाए रखती है।
दूर रहने वाले दादा-दादी के लिए